-एक- 

तुमने
कहा
इतिहास बन जाओ
हमने पूछा
वर्तमान
से क्या खतरा है ?
तुमने
कहा
हमें
भविष्य की चिंता है

दो— 

तुम
उसी पेड़ में पानी देते थे
जिसमें
फल का लगना अवश्यम्भावी था
और
उसी वृक्ष को खाद-गोबर
जिसकी छाया की
तुम्हें
भविष्य में जरुरत थी
तुम
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में फँसे थे
लेकिन
दुनिया की नज़रों में
पर्यावरण के नायक थे..

तीन — 

तुम्हारी
आँखों में दुनिया को बदलने के स्वप्न थे
और
हमारी आँखों में
तुम्हें
हासिल करने का षड्यंत्र… 


डॉ रमेश यादव
सहायक प्रोफ़ेसर, इग्नू 
नई दिल्ली 
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