जागो आदित्यनाथ !
जागो हे भुवन दीप !
मन की आशाओं में -
स्वर्ण किरण - बन बरसो !
धूमिल हों दुःख और
निराशा के अंध तिमिर ,
अश्रु भरी आँखों में 
ज्योति -कलश बन उतरो ,!
दुखियारे आंगन में ,
सुख की दुनिया रच दो ,
जागो हे किरण -पुंज !
सूने - घर -आंगन को 
नूतन सौभाग्य दो 
बाँझिन को पुत्र दो ,
ममता का दान लिए   
फैले हैं आँचल के ओर -छोर ,
भर दो झोली खाली ,
 सबको वरदान मिले 
'जागो हे ज्योतिर्मय !
नदिया की लहरों सा 
जीवन का शाश्वत क्रम
आशा विश्वासों की डूब रही नौका में 
जन -नाविक बन उतरो 
आओ हे आस- दीप !
आओ आदित्यनाथ !
मन की आशाओं में
स्वर्ण किरण बन उतरो !


पद्मा मिश्रा 
LIG--114,row house-adityapur-2
jamshedpur-13
09955614581
1 Response
  1. खुबसूरत प्रस्तुती....


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