हर-हर बम-बम भोले,
शिवभक्त जोर से बोले.
मैंने पूछा क्यों बोला,
क्या तूने मुझको तोला?

तेरा शिव तो
बस एक बार विष खाया
और नीलकंठ कहलाया,
फिर भांग खाए भकुआए हैं
जब आँख खुली त्रिनेत्र खोल
जंह-तंह तांडव बरपाए हैं.

एक मैं हूँ जो यहाँ खड़ा
हर रोज जहर पी जाता हूँ,
शासन से आँख लड़ाता हूँ,
और जुल्मों से टकराता हूँ.
दुनियां के ताने, व्यंग-बाण
अंदर-अंदर सह जाता हूँ,
गम खाता हंसी लुटाता हूँ,
फिर भी न शिव कहलाता हूँ.



आनंद मोहन, पूर्व सांसद
मंडल कारा, सहरसा
(12.01.2014)
1 Response
  1. Unknown Says:

    मत कर अपनी तुलना "शिव" से,
    सुनकर अचरज में पर जाता हूँ,
    तू तो उस "शिव" से भी महान है,
    जिसे कर्म करते सारे जहाँ ने देखा|


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