सुबह डाँट डाँटकर
जल्दी से हमे उठाती है
और रात को डाँट डाँटकर
हमे जल्दी से सुलाती है

घर से खाना खाये
बिना जाने पर डाँटती है
घर से बाहर निकालने
कि धमकी देकर
हमे खाना खिलाकर
घर से भेजती है

बारिश मे भीगकर
घर आने पर
डाँटकर तोलिये से
सिर पोछती है

हमे देखकर
हमारे दिल का हाल
समझ जाती है
 
डाँट डाँटकर हमसे सब
सच उगलवा लेती है

इसे आप जो कहो
जो समझो
माँ के प्यार
जताने का अंदाज
निराला होता है

उसकी हर डाँट
मे हमारी परवाह
हमारे लिये लाड़
प्यार छुपा होता है

समझ सको तो
समझ लो ये डाँट
बहुत प्यारी होती है
किस्मत वालो को
नसीब होती है.


गरिमा
डिंडोरी, मध्य प्रदेश

1 Response

एक टिप्पणी भेजें