तपता सूरज के संग 
मेघा आई होली खेलन 
बूंदो से नहलाया
खिलखिलाया सूरज 
बादलो संग लगा
लुकाछिपी खेलने 
खेत खलिहान खिलखिलाई
प्यासी जमीं पर बूंद
अमृत बन जब टपक आई
नदियों ने बाहें फैलाकर
बारिश का किया स्वागत
लताएँ झुक झुक के
मानो किया सावन को नमन

किसानों के चेहरे
की चमक देख
हीरे सरमाए
बांगो में फूलों
की दावत फिजाओं को
खूब भाई
देख ये सब
मोरनी पंख फैलाए
थिरक रही है
परिंदे गीत सावन के
गुनगुना रहे है
कोयल ने कु कु की
पपीहे ने  पि पि की
मेढ़क ने टर टर की
आवाज़ लगा दी
झींगुर भी क्षितिज को
दे रहा बधाई 

घर घर झूले बंध रहे
घूँघट सरकाए 
पिया मिलन को
गोरी दौड़ पड़ी है 
गुनगुन करते 
"
सावन आयो रे"
बारिश की बूंदे
सीच रही अब अंतर्मन को
आँखों के पानी
मेघा में घूल गये
बरसा ऋतू आई 
पिया मिलन संग
खुशियो की बौछारे लाई  !

 
जूली अग्रवाल , कोलकाता
2 Responses

  1. savan ke aagman par prakruti ka behatar tal mel bethaya rachna vakai khushiyo ki bochar lai hardok badhai


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